गुरु अर्जन देव जी की शहादत का इतिहास पुनः लिखने का आर.एस.एस. को कोई हक नहींः जी.के.

नई दिल्ली (23 अप्रैल 2018) : सिखों के 5वें गुरु अर्जन देव जी की शहादत के बारे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा खोज कर इतिहास पुनः लिखने का किया गया ऐलान दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी का रास नहीं आया। कमेटी अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने आज पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए चेतावनी भरे लहजे में साफ कहा कि सिख कभी भी यह बर्दाशत नहीं करेंगे कि आर.एस.एस. सिखों का इतिहास लिखे।

दरअसल आर.एस.एस. के सहयोगी संगठन अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना ने गुरु अर्जन देव जी द्वारा भारतीय संस्कृति को बचाने तथा उभारने के लिए दिये गये योगदान विषय पर बीते दिनों दिल्ली में सेमीनार करवाया था। जिसमें गुरु साहिब के इतिहास को भारतीय संस्कृति अनुसार पुनः लिखने का ऐलान किया गया था।

जी.के. ने कहा कि आर.एस.एस. को सिख इतिहास लिखने की ईजाजत नहीं दी जा सकती एवं ना ही आर.एस.एस. का सिख इतिहास को पुनः लिखने का हक बनता है। हमारे पास सिख विद्धान, शिरोमणी कमेटी, दिल्ली कमेटी एवं श्री अकाल तख्त साहिब सिख इतिहास को लिखने के बारे अधिकारिक हक रखते हैं। इनकी मुहर के बिना सिख इतिहास के किसी हिस्से को प्रमाणित नहीं किया जा सकता।

जी.के. ने सिख इतिहास को मिथिहास बनाने की ओछी चालें चलने वाले लोगों से कौम को सावधान करते हुए बताया कि गदरी बाबाओं द्वारा आजादी की लड़ाई के दौरान चलाये गये आंदोलन को इसलिए ही कई बार वामपंथी विचारधारा के साथ जोड़ा जाता रहा है। कभी सिख कौम के महान शहीद भाई मती दास एवं बाबा बंदा सिंह बहादर को उनकी पुराने पृष्ठभूमि के साथ जोड़कर सिख बताने से किनारा करने की कोशिश भी कई बार हुई है। शहीदे आजम भगत सिंह को भी सिख बताने की जगह गैरसिख के रूप में नास्तिक विचारधारा के धारणी के रूप में प्रचारित किया जाता है।

पत्रकारों द्वारा देश के अल्पसंख्यक समुदाय में पाये जा रहे डर के माहौल के बारे पूछे गये सवाल का जवाब देते हुए जी.के. ने कहा कि यदि सरकार एवं उसके साथी संगठन कोई ओछी हरकत करते हैं तो यह अल्पसंख्यक समुदायों को किसी अन्य दिशा की ओर मोड़ने का माध्यम बनेंगे। इस संबंधी उन्होंने कांग्रेस द्वारा सिखों के साथ 1980-90 में दशक में लिये गये पंगे के बाद सिखों द्वारा किये गये हश्र को याद रखने की नसीहत भी दी।




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